रायपुर छत्तीसगढ से मेघा तिवारी
हमारे समाज में यह सोच गहराई तक बैठ चुकी है कि हर तरह के अपराध से लड़ने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की है। लड़कियों के साथ अपराध रोकना हो, स्कूल-कॉलेजों की रैगिंग हो, बच्चों का शोषण या बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार – हर घटना का बोझ पुलिस पर डाल दिया जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या समाज की कोई जिम्मेदारी नहीं है? क्या नागरिकों का कर्तव्य केवल तमाशबीन बने रहना है?

पुलिस का समर्पण, लेकिन सहयोग कहाँ?
पुलिस अपने सीमित साधनों और संसाधनों के बावजूद 24 घंटे ड्यूटी पर रहती है। त्योहारों, छुट्टियों और अपने निजी जीवन की बलि देकर भी पुलिस जनता की सुरक्षा में तैनात रहती है। ऐसे में केवल पुलिस से ही उम्मीद करना उचित नहीं है।
दुर्भाग्य की बात यह है कि किसी भी अपराध या हादसे की स्थिति में लोग मदद करने की बजाय मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना और सोशल मीडिया पर वायरल करना ज्यादा ज़रूरी समझते हैं। अगर जनता पुलिस का सहयोग करे, मौके पर समझदारी और साहस दिखाए तो कई अपराध वहीं रुक सकते हैं।
समाज और पुलिस – साथ-साथ ही संभव है बदलाव
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जितनी ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी नागरिकों का सहयोग भी है। अपराध तभी कम होंगे जब समाज अपनी जिम्मेदारी समझे और पुलिस का साथ दे।
इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम केवल पुलिस पर निर्भर रहना छोड़ें और एक जागरूक, जिम्मेदार नागरिक बनकर एक सुरक्षित समाज की नींव रखें।
आपके आसपास हो रहे अपराध या समाज में हो रहे किसी भी तरह के अपराध की जानकारी अगर आप हमें देना चाहते हो तो नीचे दिए हुए व्हाट्स नंबर पर संपर्क करें
9691983739