छत्तीसगढ़ में संविदा नियुक्ति पर बवाल: चौथी बार रिटायर अधिकारी की नियुक्ति से प्रशासनिक सेवा संघ नाराज़

Share Post

रायपुर, छत्तीसगढ़ से मेघा तिवारी

छत्तीसगढ़ में संविदा नियुक्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा संघ (CASA) ने जिलों में संविदा अपर कलेक्टर नियुक्तियों को तुरंत खत्म करने की मांग की है। वहीं बेमेतरा जिले में हाल ही में हुए कार्यविभाजन ने इस विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है।

कलेक्टर ने संविदा अधिकारी को दिया वित्त और राजस्व कोर्ट का प्रभार

1 सितम्बर को जारी आदेश के तहत बेमेतरा कलेक्टर ने कार्यविभाजन किया। इस आदेश में चौंकाने वाली बात यह रही कि एक संविदा अधिकारी को न केवल जिले के वित्तीय विभागों का प्रभार दिया गया बल्कि राजस्व न्यायालय का काम भी सौंप दिया गया। नियमों के अनुसार यह जिम्मेदारी केवल नियमित अधिकारियों को दी जानी चाहिए, लेकिन संविदा अधिकारी को यह जिम्मेदारी देकर प्रशासन में असंतोष की लहर दौड़ गई।

WhatsApp Image 2025 09 06 at 14.00.45 ae92cb1c

संविधान और नियमों की अनदेखी

संविधान और सेवा नियमों में स्पष्ट है कि सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति केवल अपवादस्वरूप और सीमित अवधि के लिए दी जा सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि एक रिटायर अधिकारी को चौथी बार संविदा पर नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। इसमें जिला कलेक्टर, एक वरिष्ठ मंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

CMO तक पहुँची संविदा नियुक्ति की फाइल

सूत्रों का दावा है कि यह फाइल अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) पहुँच गई है। अब सभी की नजर “सुशासन बाबू” के फैसले पर टिकी हुई है।

WhatsApp Image 2025 09 06 at 14.00.45 9d515faaWhatsApp Image 2025 09 06 at 14.00.47 c7e60d0bWhatsApp Image 2025 09 06 at 14.00.46 e86f5c06

CASA का विरोध, लेकिन फाइल आगे बढ़ी

CASA ने इस पूरे मामले का कड़ा विरोध दर्ज करते हुए GAD सचिव को पत्र लिखा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, विवादित संविदा अधिकारी ने सचिव से व्यक्तिगत मुलाकात की और इसके बाद संघ के विरोध पत्र को दरकिनार कर दिया गया। यही कारण है कि संघ अब भी नाराज़ है और इसे नियमविरुद्ध व अधिकारियों के अधिकारों का हनन मान रहा है।

‘संविदा नियुक्ति करोड़ों का खेल’ – सूत्र

कई सूत्रों का आरोप है कि संविदा नियुक्ति अब “करोड़ों का खेल” बन चुकी है। बेमेतरा के कार्यविभाजन से यह साफ झलकता है कि संविदा अधिकारी को प्रशासनिक जिम्मेदारी से ज्यादा “वसूली अधिकारी” की भूमिका में नियुक्त किया गया है।
वर्तमान में जिले में दो ADM (अपर कलेक्टर) पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर संविदा अधिकारी को सबसे शक्तिशाली विभाग सौंपा गया।


 मुख्य सवाल

  • जब पर्याप्त संख्या में नियमित अधिकारी मौजूद हैं, तो संविदा नियुक्ति क्यों?

  • क्या संविदा नियुक्ति केवल “वसूली” और “राजनीतिक संरक्षण” का माध्यम बन चुकी है?

  • मुख्यमंत्री कार्यालय इस विवाद पर क्या निर्णय लेगा?

    आपके आसपास हो रहे अपराध या समाज में हो रहे किसी भी तरह के अपराध की जानकारी अगर आप हमें देना चाहते हो तो नीचे दिए हुए व्हाट्स नंबर पर संपर्क करें

    9691983739

Leave a Comment