गोरखपुर (उत्तर प्रदेश):
गोरखपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राप्तीनगर बिजली विभाग के SDO भानु प्रताप पासवान पर आरोप है कि वे दिन में सरकारी अफसर और रात में भोजपुरी फिल्मों के गायक बन जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, “पतली कमर”, “साली संग फगुआ”, “भीगा देलू यार”, “लहंगवा ललके चाही” जैसे आपत्तिजनक गीतों की रिकॉर्डिंग और रिलीज़ में उनकी सक्रिय भूमिका बताई जा रही है।
खुलासा हुआ है कि पासवान ने Priviz Entertainment में अवैध निवेश कर करोड़ों रुपये का निजी मुनाफ़ा कमाया, जबकि विभागीय अनुशासन को ताक पर रखकर बिना अनुमति रिकॉर्डिंग और कारोबार किया।
आरोप है कि यह सब मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव और अधीक्षण अभियंता लोकेंद्र बहादुर सिंह के संरक्षण के बिना संभव नहीं था।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता अर्पित जायसवाल का कहना है – “अगर वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण न होता तो क्या एक SDO इतनी खुली छूट पा सकता था?”
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया:
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गोरखपुर की जनता सोशल मीडिया पर भड़की हुई है।
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सवाल उठ रहे हैं: “ड्यूटी बिजली सप्लाई की या भोजपुरी एल्बम बनाने की?”
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जनता की मांग है कि SDO भानु प्रताप पासवान को तत्काल निलंबित किया जाए और संरक्षण देने वाले अफसरों की उच्चस्तरीय जांच हो।
बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहनगर गोरखपुर की पहचान भ्रष्टाचार और आपत्तिजनक गीतों से होगी, या सरकार सख्त कार्रवाई कर नजीर पेश करेगी।