रायपुर, छत्तीसगढ़ | मेघा तिवारी
श्राद्ध पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह सोलह दिन केवल पूर्वजों को समर्पित होते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. अंकित दुबे ने बताया कि इस अवधि में पितरों की आत्मा को तृप्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करना आवश्यक है।

✦ तर्पण और श्राद्ध का महत्व
पितृपक्ष के 16 दिनों तक प्रतिदिन तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।यदि प्रतिदिन तर्पण संभव न हो तो सर्वपितृ अमावस्या पर तीर्थस्थलों जैसे उज्जैन, गया, हरिद्वार, प्रयागराज में तर्पण या पिंडदान करना शुभ माना जाता है।पितरों को जल अर्पित करने से घर-परिवार को शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
✦ पितृपक्ष में क्या न करें
इस दौरान शुभ कार्य (शादी, गृहप्रवेश, नई खरीदारी) नहीं करनी चाहिए।नए वाहन, कपड़े या कीमती वस्तुएँ खरीदना शास्त्रों में वर्जित है।

✦ पितृपक्ष में क्या करें
पितरों की तिथि पर ब्राह्मण भोज कराना अत्यंत पुण्यदायी है।परंपरा के अनुसार 1, 3, 5 या 11 ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।इसके अलावा गाय, कुत्ते और भूखे व्यक्तियों को भोजन कराना भी पितरों को प्रसन्न करता है।दान-पुण्य करना, विशेषकर अन्न और वस्त्र दान, पितरों की आत्मा को तृप्त करता है।
✦ शास्त्रों की मान्यता
मान्यता है कि पितृ केवल इन 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं। इस समय उन्हें अर्पित किया गया जल और अन्न उनके लिए अमृत समान होता है, जो हमें परिवार के लिए शीतलता, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करता है।
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