धमतरी बना ग्रीन पटाखों का केंद्र: 100 से अधिक महिलाओं को रोज़गार, दिवाली होगी स्वच्छ और सुरक्षित

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छत्तीसगढ़ | मेघा तिवारी

धमतरी जिले के ग्राम चटोद में महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे ग्रीन पटाखे अब दिवाली को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह पहल न केवल प्रदूषण को कम करने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की “लोकल से वोकल” भावना को भी मजबूत कर रही है।

✦ कलेक्टर ने किया निरीक्षण

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने श्री गणेशा फायरवर्क्स यूनिट का दौरा किया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने महिला कर्मचारियों से संवाद कर पटाखों की निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता की जानकारी ली। मौके पर उन्होंने ग्रीन पटाखा चलाकर इसकी सुरक्षा और प्रभाव का भी अनुभव किया।

✦ सुरक्षा पर सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यूनिट प्रबंधन को निर्देश दिए कि:

फैक्ट्री परिसर में हर समय अग्निशमन की मजबूत व्यवस्था रहे।

समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।

परिसर में माचिस और अन्य ज्वलनशील पदार्थ लाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।

सुरक्षा सूचना बोर्ड प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएं।

✦ ग्रीन पटाखों की विशेषताएँ

यूनिट के सेल्स हेड आशीष सिंह ने बताया कि ग्रीन पटाखों में बारूद का उपयोग नहीं होता, जिससे ये पूरी तरह सुरक्षित और प्रदूषण रहित रहते हैं। पांच एकड़ भूमि पर स्थापित इस यूनिट में अब तक 100 से अधिक महिलाओं को सीधा रोज़गार मिला है। आने वाले समय में विवाह समारोहों और अन्य आयोजनों के लिए भी ग्रीन पटाखों की विभिन्न किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी।

धमतरी जिले में शुरू हुई ग्रीन पटाखों की पहल ने दिवाली को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। ग्राम चटोद की महिलाएँ पर्यावरण अनुकूल पटाखे बना रही हैं जिससे रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण को बल मिल रहा है।
धमतरी जिले में शुरू हुई ग्रीन पटाखों की पहल ने दिवाली को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। 

 

✦ महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल

कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि ग्रीन पटाखा यूनिट आत्मनिर्भरता, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा प्रयास है। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ समाज को सुरक्षित विकल्प भी उपलब्ध कराती है।

✦ धमतरी बनेगा ग्रीन आतिशबाज़ी का केंद्र

यह पहल धमतरी जिले को स्वच्छ आतिशबाज़ी के केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगी। दिवाली जैसे त्योहार अब प्रदूषण रहित और सुरक्षित होंगे। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और यह पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

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