रायपुर, छत्तीसगढ़ से मेघा तिवारी
रायपुर (छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी न्यायालय और लोक आयोग के समन के बावजूद पेश नहीं हो रहे हैं, जिससे राज्य में चल रहे बिना मान्यता वाले प्राइवेट स्कूलों को संरक्षण मिलने की आशंका और गहरी हो गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने आरोप लगाया है कि राज्य के हजारों गरीब छात्रों को आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) से वंचित करने के लिए शिक्षा सचिव और डीपीआई कार्यालय के अधिकारी प्राइवेट स्कूल माफिया के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।
लोक आयोग ने शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत उपस्थित होकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। लेकिन अब तक वे अनुपस्थित रहे हैं।


कृष्णा पब्लिक स्कूल विवाद और गैर-मान्यता वाले स्कूल:
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रायपुर के कृष्णा पब्लिक स्कूल प्राचार्य पर बिना मान्यता के छह स्कूल संचालित करने का आरोप है।
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इन स्कूलों का यूनिफॉर्म, सिलेबस, टाई और लोगो सब कृष्णा पब्लिक स्कूल के जैसे ही हैं।
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टाटीबंध स्थित शाखा में एक छात्रा चलते स्कूल वैन से गिर चुकी है और वैन कृष्णा पब्लिक स्कूल सरोना (सीबीएसई मान्यता) की थी।
शिकायत और जांच रिपोर्ट:
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विकास तिवारी ने लोक आयोग में पिछले वर्ष शिकायत दर्ज करवाई थी।
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जांच कमेटी ने आरोपों को सही पाया और कार्रवाई हेतु रिपोर्ट संयुक्त संचालक रायपुर को भेजी।
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लेकिन जेडी रायपुर योगेश शिवहरे, जिला शिक्षा अधिकारी आर.एल. ठाकुर और हिमांशु भारतीय ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
छात्रों के भविष्य पर संकट:
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बिना मान्यता के स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों का अपार आईडी नहीं बन पा रहा है।
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पालकों से हर महीने लाखों रुपये की अवैध फीस वसूली जा रही है।
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गरीब छात्रों को निःशुल्क शिक्षा से वंचित रखा जा रहा है।
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शिक्षा विभाग के संरक्षण में चल रहे इन स्कूलों से शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है।
हाईकोर्ट और लोक आयोग की तलब:
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सिद्धार्थ कोमल परदेशी को दो बार हाईकोर्ट और दो बार लोक आयोग में तलब किया गया।
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अनुपस्थित रहने का सीधा फायदा प्राइवेट स्कूल माफिया को और नुकसान छात्रों को हो रहा है।
विकास तिवारी का आरोप है कि शिक्षा सचिव धृतराष्ट्र बने बैठे हैं और गैर-मान्यता स्कूलों की खुली लूट पर आंख मूंदे हुए हैं।